Meri Kalam Se Raj Sargam

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Monday, 30 March 2020

हो कब बहाल शांति

 हो कब बहाल शांति


हो कब बहाल शांति
Covid19

कुदरत इस वक्त ख़ुद को संवार रही है 

स्वयं को आईने में उतार रही है 

दी बहुत पीड़ा मनुष्य जाति ने इसे 

कुछ समय एकांत में गुज़ार रही है



हरियाली बिंदी, फूलते प्रसून झुमके कान के

बहती हवाएँ सौंदर्य प्रसाधन इसकी शान के

रखा था झकझोर इसके नैसर्गिक सौंदर्य को

बैठेगी पहने ये कुछ क्षण वस्त्र वीरान के 


झुण्ड पक्षियों के दिखे चहलकदमी करते शहर में

करने लगी नृत्य मिल के लहर लहर में

दिखे पेड़ तले कुछ झुण्ड सील मछलियों के

मिलकर कुटुम्ब संग गा रहे थे ग़ज़ल बहर में


गलियाँ जो हो चुकी हैं ध्वस्त हमारे शोर से

लग गए हैं वहाँ ढेरों सन्नाटे किसी दौर से

न भाँप पाए हम इनकी मनोस्थिति

छुपे बैठे हैं हम आज अपने ही घर किसी चोर से


है पसरी कुदरत के तिनके-तिनके में शांति

बैठा है सोए मानो गई हो आ नींद में क्रांति

न हम पक्ष के और न रह गए हैं विपक्ष के

है फैसला कुदरत के अधीन के हो कब बहाल शांति।


-राज सरगम 
covid19 deserted hindi poem lockdown nature situation solitude

Friday, 20 March 2020

Corona

Corona


Corona
Corona 

मंदिर शून्य, मस्जिद शून्य 
कमाओ घर बैठे पुण्य 
बैठी गलियाँ दुबक कर 
पकड़े कोने सुबक-सुबक कर 
बैठ गया डर वायु में 
न करे कटाव Corona आयु में 
बिसरा दो नाक भी है 
करना हाथ से साफ भी है 
करे खीसा माँग Sanitizer की 
करो पूर्ण, है विनति शायर की 
धोते रहो हाथ अपने बारम्बार 
करो इस्तेमाल Mask भी यार 
होकर निर्भिक करें Epidemic का सामना 
उठ जाए शीघ्र इसका दाना-पानी यही कामना।


-राज सरगम 
coronavirus hindi poem epidemic mask sanitizer

Thursday, 19 March 2020

शाम और इंतज़ार | Shaam aur intezaar

शाम और इंतज़ार 

intezar shairy
loneliness 
है अन्यमनस्क सी शक्ल अलफ़ाज़ की 

एक शाम और इंतज़ार सदियों का 

शायद हक -ए -मोहबत मेरे हिस्से नहीं 

 जलाये है उत्कण्ठा मुझे विसाल की 

है इल्म , रहेगी फ़िराक़ दर पे ताले सी 

इसके अलावा ज़ीस्त के किस्से नहीं। 


-राज सरगम 
brokenheart poem intezar shairy lonely sadness wait

Tuesday, 10 March 2020

मन्नत

मन्नत


मन्नत
freedom


सोने में आंकी इस पिंजरे की कीमत, तोड़ती है हरपल मेरी हिम्मत

 फट जाता है दर्द से सीना मेरा, मेरे खुदा; मिलेगी कब मुझे जन्नत 

 हूँ प्रेम दीवानी मैं तो बहते मेघों की, माथा इनका कब चूम पाऊँ 

 टूट जाए ये बेड़ी, अश्कों में सने बोझिल मन की है यही मन्नत।


-राज सरगम 

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Sunday, 8 March 2020

गूँजे मनवा मा होरी- होरी

गूँजे मनवा मा होरी- होरी

गूँजे मनवा मा होरी- होरी
Holi


राधा- मीरा में झड़प हुई
श्याम पाने की तड़प हुई

हुए दोनों के मन व्याकुल
मुकुल श्याम, श्याम ही फूल

कहाँ हो फागुन के स्वामी
निभाओ आकर रस्में पुरानी

बनी हैं होड़ की आकृतियाँ
धुल जाएँ, आओ  इन गलियां

गूँजे मनवा मा होरी- होरी
आकर रंग लो काया गोरी।


-राज सरगम 
colors festival holi Lord Krishna

अभी तो मैं तुतलाता हूँ

अभी तो मैं तुतलाता हूँ


अभी तो मैं तुतलाता हूँ
World Women's Day


अभी तो मैं तुतलाता हूँ 
हर छोटी बात पे झुंझलाता हूँ 
हो वजह सूक्ष्म या बड़ी पहाड़- सी 
मैं तो बस माँ को ही बुलाता हूँ 
अभी तो बच्चा हूँ
 मुझमें बचपन को ज़िन्दा रहने दो
 मैं तो हर पल अपनी ही दुनिया में खोया रहता हूँ
 सिवाय माँ के मेरा न किसी से वास्ता है 
मैं तो अभी तक ठीक से चल भी नहीं पाता हूँ 
माँ के पावन पाँव ही मेरी मंज़िल, मेरा रास्ता है 
कहते हैं मुझसे लड़खड़ाते मेरे नन्हे कदम, चलना धीरे-धीरे 
नहीं माँ से खूबसूरत गुलदस्ता है
अभी तो बच्चा हूँ
 मुझमें बचपन को ज़िन्दा रहने दो


-राज सरगम  
affection motherhood women world women's day

Thursday, 5 March 2020

अपनेपन का Revenue

पनेपन का Revenue

अपनेपन का Revenue
relationship

रिश्तों की  Website में अगर 

 अपनेपन का Revenue generate करना है 

तो हमें ढेर सारे  Backlinksचाहिएं 

ज़्यादा  Dofollow, और कम से 

Nofollow links का रेशियो होना चाहिए 

Dofollow links मोहबत को दावत देंगे 

और  Nofollow links हल्की सी तकरार लाएँगे 

क्योंकि सूक्ष्म नोंक झोंक रिश्तों में अनिवार्य भी है 

ये मुट्ठी भर तकरार ही प्रेम को गहरे रंग दे जाती है।


-राज सरगम 


bonding connectivity empowerment relationship

Friday, 28 February 2020

अलहदा- सी मनमर्ज़ियाँ

अलहदा- सी मनमर्ज़ियाँ


अलहदा- सी मनमर्ज़ियाँ
अलहदा- सी मनमर्ज़ियाँ

किसी का चेहरा साफ है तो किसी का दिल

चढ़े हत्थे किसी के ताड़, तो किसी के तिल

 हैं रब की भी अलहदा- सी मनमर्ज़ियाँ 

है हासिल कभी पग-पग, तो है कभी मील।

-राज सरगम 
almighty ambitions life motivational quote

Thursday, 20 February 2020

रात्रि तेरी नटराज

रात्रि तेरी नटराज


रात्रि तेरी नटराज
Shivraatri

मन में मेरे रूप तेरे सारे
 कारे क्षण दिखे उजियारे

 अनुकम्पा तेरी बदरा में 
उपजे फुलवा अचरा में 

 प्रीत तुझसे शनै: शनैः लागी 
छांह तेरी विधाता हुआ वैरागी 

 हूँ नतमस्तक करूँ अभ्यर्थना 
रात्रि तेरी नटराज, करूँ अर्चना 

 स्वर्ग तू, मोक्ष तू, तू प्रलयकाल 
स्वप्न तू, वास्तव तू, तू महाकाल 

 हैं अंजुरी में किंचित मुकुल
 कर करूणा से पुष्प मृदुल 

 चरणों में हमें सर्वदा शीश नवाना
 तू वायु सदृश, न अन्यत्र जाना।

-राज सरगम 
Indian festival Lord Shiva Mahashivratri psalm

Thursday, 13 February 2020

Valentine's Day

Valentine's Day


Valentine's Day
valentine's day
सत्य की प्रत्यंचा पे झूठ के शर नहीं चढ़ते 

कागज़ी गुलाब गुलदान में कभी नहीं बढ़ते


साधा है तुमने एक ही निशाना इश्क के लिए

जिसे तुम Valentine's Day कह नहीं थकते


कैसे निभाया जाता है प्रेम साल के 365 दिन

पूछो माँ से, अगर माँ पे हो तुम श्रद्धा रखते।


-राज सरगम 
lovers motherhood pure love valentine day

 

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